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January, 2017
इतिहास विभाग ने सुभाष चंद्र बोस जयंती मनाई
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इतिहास विभाग ने सुभाष चंद्र बोस जयंती मनाई

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के इतिहास विभाग में सुभाष चंद्र जयंती मनाई गई। बी.ए. प्रथम वर्ष के छात्र जितेन्द्र कुमार ने सुभाष चंद्र बोस की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस अत्यंत मेघावी छात्र थे। 1920 में उन्होने आइ.सी.एस. की परीक्षा उत्तीर्ण की किंतु देशप्रेम की भावना के कारण अंग्रेजी शासन के अधीन नौकरी करना स्वीकार नही किया। 24 वर्ष की आयु में वे सक्रिय राजनीति में भाग लेने लगे।
डाॅ. शैलेन्द्र सिंह ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सुभाष चंद्र बोस कांग्रेस को शक्तिशाली बनाना चाहते थे। फिर भी महात्मा गांधी जी के विचारों से वे कभी सहमत न हो सके, फिर भी गांधी जी के अनेक आंदोलनों में उन्होने भाग लिया। 1938 में कांग्रेस के हरीपुरा अधिवेशन में वे गांधी जी के इच्छा के विरुद्ध अपना नामांकन कराया और पट्टावीसीतारम्मैया को हराकर कांग्रेस के अध्यक्ष निर्वाचित हुए, अप्रेल 1939 में कांग्रेस से त्याग पत्र देकर फारवर्ड ब्लास नामक दल बनाया। प्रो. नन्दकिशोर सिन्हा ने कहा कि वीर सावरकर ने सुभाष चंद्र बोस की क्षमता को पहचाना तथा उन्हे छोटे-छोटे आंदोलनों में अपनी शक्ति व्यय करने के स्थान पर कोई ठोस कार्य करने के लिए कहा। सुभाष चंद्र बोस ने इटली,  जर्मनी, जापान से सहायता लेकर भारत को आजाद करने का प्रयास किया उनका योगदान भारतीय इतिहास में अविश्मरणीय रहेगा।

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